क्‍या आयुर्वेद से दूर हो सकती है इनफर्टिलिटी की समस्‍या- Kya Ayurveda Se Dur Ho Sakti Hai Infertility ki Samaya

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क्‍या आयुर्वेद से दूर हो सकती है इनफर्टिलिटी की समस्‍या- Kya Ayurveda Se Dur Ho Sakti Hai Infertility ki Samaya

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में इनफर्टिलिटी की समस्‍या एक गंभीर विषय बनता जा रहा है। इनफर्टिलिटी की समस्‍या जिसे हम निसंतानता भी कहते है। यह प्रजनन प्रणाली की एक ऐसी समस्या है जो महिला और पुरूष दोनों में हो सकती है, जिससे एक महिला गर्भधारण करने में असफल होती है।  

अगर एक साल तक यौन प्रयासों के बाद भी महिला को गभर्वती नहीं होती तो इसका मतलब यह है कि महिला में इनफर्टिलिटी की समस्या है। साथ ही महिला के प्रजनन क्षमता में कमी है जो उन्हें कंसीव करने में दिक्कत दें सकता है। 

अगर हम आकड़े की बात करें तो आईवीएफ का सफल रेट 30 फीसदी तक है, जो कुल दंपत्ति का काफी कम प्रतिशत है। ऐसे में उन दंपत्तियों के लिए आयुर्वेद से बच्चा न हो पाने की समस्या को दूर किया जाता है। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको इनफर्टिलिटी की समस्‍या और गर्भधारण होने के लिए प्रकृतिक उपचार के बारे में विस्तार से बातएंगे। 

आयुर्वेद में इनफर्टिलिटी की समस्या का सफल इलाज- Ayurveda Mein Infertility Ki Samasya Ka Safal Ilaj

यूं तो इनफर्टिलिटी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए एलोपेथी इलाज हैं, पर फिर भी कुछ मामलों में अधिकांश दंपत्ति निसंतान रह जाते हैं। हमारी 5000 साल पुरानी पद्धति आयुर्वेद में बच्चा न हो पाने की समस्या को दूर करने के लिए दावे किए जाते है। बता दें कि आयुर्वेद के अनुसार इनफर्टिलिटी की समस्या को वायु जनरित रोग माना गया है। 

आमतौर पर इनफर्टिलिटी एक ऐसी समस्या है, जिसमें एक महिला गर्भधारण नहीं कर पाती या फिर बार बार गर्भपात होने की संभावना भी बढ़ जाती है। हमारी फर्टिलिटी डॉक्टर चंचल शर्मा के मुताबिक आयुर्वेद में निसंतानता का सफल इलाज आज से नहीं पुराने काल से चला आ रहा है। आयुर्वेद का 90 फ़ीसदी से भी ज्यादा सफल रेट है जो आश्चर्यजनक रिजल्ट है, जबकि आईवीएफ में इसके सफल होने की संभावना काफी कम है और आम लोगों की पहुंच से बाहर है।  

इनफर्टिलिटी की समस्या का कारण- Infertility Ki Samasya Ka Karan

निसंतानता की समस्या के कई कारण होते हैं। हालांकि इसका एक सटीक कारण बताना बेहद मुश्किल है, लेकिन कुछ सामान्य कारण हैं, जिनके बारे में जानना चाहिए। इन निम्नलिखित में इनफर्टिलिटी की समस्या का कारण शामिल हैं-

  • अनओवुलेशन

ओवुलेशन न होना और अनओवुलेशन, एक विकार है जिसमें अंडे सही से विकसित नहीं होते है। या अंडे के फॉलिकल इन्हें जारी नहीं किया जाता है। जिन महिलाओं को यह विकार है, उनमें कई महीनों तक मासिक धर्म नहीं होने की परेशानी होती है। कुछ को मासिक धर्म हो भी सकता है भले ही वे ओवुलेट नहीं कर रही हों।

  • पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) 

पीसीओएस का मतलब होता है कि पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम जो एक गंभीर बीमारी होती है। यह एक मेटाबोलिक डिसऑडर है जोकि महिला के हर्मोनल इम्बैलेंस से जुड़ा होता है। इस स्थिति में ओवरी पुरुष हर्मोन ज्यादा मात्रा में रिलीज करना शुरु कर देता है जिससे ओव्यूलेशन में अनियमित होती है। इस स्थिति में अंडाशय में बहुत सारे सिस्ट बन जाते है। 

  • पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसऑर्डर पीसीओडी

पीसीओडी का मतलब होता है पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसऑर्डर है जो अंडशय में टाइम से पहले ही एग्स को  रिलीज कर देता है। जिससे अंडशय में सिस्ट बन जाते है और ओवरी का साइज बन जाते है। यह महिलाओं में एण्ड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन के बढ़ने का विकार होता है।  

  • हाइपोथैलेमस डिसफंक्शन

हाइपोथैलेमस ब्रेन का एक छोटा और अहम भाग होता है। ये एक ग्रंथि (आपके मस्तिष्क में मौजूद) है जो आपके शरीर के कई जरूरी कार्यप्रणालियों और हार्मोन सिस्टम को नियंत्रित और रेगुलेट करने के लिए जिम्मेदार है। ये नर्व्स सिस्टम और एंडोक्राइन सिस्टम के बीच की सबसे अहम कड़ी होती है। हाइपोथैलेमस शरीर को होमियोस्टैसिस (homeostasis) नामक स्टेबल स्टेट में संतुलित रखता है। यह ग्रंथि पिट्यूटरी ग्रंथि को हार्मोन जारी करती है जो आगे इन हार्मोनों को आपके अंडाशय सहित आपके कई अंगों में भेजती है। यह ग्रंथि आपके मासिक धर्म चक्र को भी प्रभावित कर सकती है।

  • ब्लॉक फैलोपियन ट्यूब (Tubal Blockage)

यह महिला इनफर्टिलिटी के मुख्य कारणों में से एक है। फैलोपियन ट्यूब गर्भधारण करने में बहुत ही अहम भूमिका निभाती है। ब्लॉक फैलोपियन ट्यूब (Tubal Blockage Treatment) के कारण निषेचन की प्रक्रिया यानी अंडे और शुक्राणु के मिलने में बाधा आ सकती है।

  • एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)

एंडोमेट्रियोसिस एक प्रजनन विकार है जो महिलाओं को प्रभावित करता है। इस स्थिति में गर्भाशय की दीवारों को लाइन करने वाले टिशू गर्भाशय के बाहर बढ़ते हैं। और फिर यही टिशू गांठ बन जाते हैं। कभी-कभी, यह असामान्य रूप से अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब जैसे अंगों का प्रभावित करता है। जोकि एक दर्दनाक स्थिति होती है। आमतौर पर, यह गांठ अपने आप समाप्त हो जाती है। यह 2 प्रकार का होते है- बाहरी और आंतरिक। 

इनफर्टिलिटी की समस्या का आयुर्वेदिक इलाज- Infertility Ki Samasya Ka Ayurvedic Ilaj

आयुर्वेद के अनुसार प्रजनन क्षमता प्राप्त करने के लिए गर्भ की तैयारी सबसे महत्वपूर्ण कारक है। आजकल लोग जिस तरीके की जीवनशैली जी रहे है उन्हें कुछ ऐसी बीमारी होती है जिन्हें शुरूवात में नजरअंदाज किया जाता है। लेकिन बाद में गर्भधारण करने में भी गहरा असर डालती है। अधिकांश महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या का मुख्य कारण फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉक होना है जिसके कारण गर्भाधरण नहीं हो पाता है। 

आयुर्वेद में कुछ ऐसी जड़ी-बूटी और थैरेपी होती है जिसकी मदद से कंसीव कराया जाता है। आयुर्वेद प्रजनन उपचार/ पंचकर्म उपचार चयापचय को नियमित और बेहतर बनाता है। यह सभी त्रिदोषों में वात, पित्त और कफ को एक संतुलन स्थिति में बनाए रखता है। यह सभी हार्मोन और प्रजनन प्रणाली को एक संतुलन स्थिति में रखता है। यह शरीर से सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और मासिक धर्म को नियमित करता है।

पंचकर्म थेरेपी और जड़ी-बूटियों के संयोजन से इनफर्टिलिटी की समस्या का समाधान किया जाता है। 

आयुर्वेद में उत्तरबस्ती नामक उपचार पद्धति बेहद लाभकारी है। उत्तर बस्ती थेरेपी (Ayurvedic Treatment for infertility) पंचकर्म की बढ़िया चिकित्सा (Best Doctor for infertility) विधि है। आयुर्वेद में बिना किसी चीर-फाड़ के इस विधि से फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होने पर ठीक किया जाता है। उत्तर बस्ती में अपके योनी में औषधीय तेल और हर्बल डाला जाता है। इस थेरेपी में कोई दर्द नहीं होता और नेचुरल तरीके से फैलोपियन ट्यूब को खोला जाता है। आईवीएफ (IVF) या लैप्रोस्कोपी के मुकाबले में उत्तर बस्तीमें कम खर्च आता है और सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी सफलता दर भी आईवीएफ के मुकाबले ज्यादा है।

आखिर में आपको यही सलाह दी जाती है कि ऐसे भोजन का सेवन करें जो असानी से पच सकें। मैदा से बने खादुय पदार्थ का सेवन बिल्कुल न करें, साथ ही दही, केले, बेसन, चने की दाल और गरम मसाले के सेवन से बचें। खानपान के अलावा आप दिन में एक बार योगा जरुर करे जो फर्टिलिटी रेट को बूस्ट करने में मदद करता है। सुर्य नमस्कार, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम, तितली आसन, कपालभाती, नौकासन, भ्रमारी प्राणायाम और 30 मिनट तक पैदल चले।

इस लेख की जानकारी हमें डॉक्टर चंचल शर्मा द्वारा दी गई है। इस विषय से जुड़ी या अन्य पीसीओएस, ट्यूब ब्लॉकेज, एंडोमेट्रओसिस, हाइड्रोसालपिनक्स उपचार पर ज्यादा जानकारी चाहते हैं। हमारे डॉक्टर चंचल की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाए या हमसे +91 9811773770 संपर्क करें।

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